Film Budget Breakdown – इन 8 स्टेप्स से किसी बॉलीवुड फिल्म का बजट तैयार जाता हैं

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फिल्म बजट तय करने की प्रक्रिया में स्क्रिप्ट, कलाकारों की फीस, लोकेशन, तकनीकी टीम, VFX और मार्केटिंग जैसे कई महत्वपूर्ण खर्च शामिल होते हैं।

फ्रेंड्स नमस्कार कैसे हो आपलोग, आज हम बात करने वाले हैं Film Budget Breakdown के बारे में, उससे पहले आप सभी का दिल से धन्यवाद हमारे इस ब्लॉग पर विश्वास जताने के लिए, मैं Bollywood Help Center वादा करता हैं आपके विश्वास पर हमेशा खड़ा उतरेगी, और ऐसे ही कैरियर बनाने में आपका सपोर्ट करती रहेगी।

तो चलिए अब बात करते हैं कि किस तरीके से किसी भी बॉलीवुड फिल्म का बजट तैयार किया जाता है और हम जानेंगे उसके क्या-क्या फैक्टर्स होते हैं, कैसे फिल्म का बजट तैयार किया जाता हैं, किन-किन बातों का ध्यान रखा जाता है और कैसे डिसाइड किया जाता है कि क्या इस बजट में यह फिल्म तैयार हो जाएगी तो चलिए शुरुआत करते हैं और जानेंगे पूरे विस्तार से।

आपने अक्सर सुना या पढ़ा होगा किसी फिल्म की घोषणा होने साथ ही फ़िल्म का अनुमानित बजट भी मीडिया में आ जाता हैं जैसे अभी रामायण रणवीर सिंह की फ़िल्म को ही ले ले तो बताया जाता हैं कि इस फ़िल्म का बजट 1000 करोड़ हैं जो कि अनुमानित हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि यह बजट कैसे तैयार किया जाता है और कौन इस बजट को तैयार करता है और फाइनली कौन इसको स्वीकृति देता है कि कितने बजट में यह फिल्म बनेगी जानेंगे पूरे विस्तार से

फ़िल्म की कहानी को देखकर बजट का अनुमान लगाया जाता हैं।

क्योंकि जब भी कोई प्रोड्यूसर या निर्माता किसी फिल्म की तैयारी करता है और बनाने की सोचता है तो सबसे पहले वह एक स्टोरी ढूंढता है स्टोरी राइटर से संपर्क करता है और उससे वह स्टोरी लेता है उसका जो भी स्टोरी का चार्ज होता है स्टोरी राइटर को देकर  उससे कहानी का सारा कॉपीराइट अपने पास ले लेता हैं।

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उसके बाद निर्माता या जो भी स्टूडियो फिल्म को प्रोड्यूस करना चाहती है वह एक डायरेक्टर को हायर करती है डायरेक्ट के साथ बैठकर उसे स्टोरी पर डिस्कशन किया जाता है उस स्टोरी को पूरी तरह से पढ़ा जाता है।

उसके बाद उस स्टोरी से ये निम्नलिखित पॉइंट्स को नोट डाउन किया जाता हैं जो Film Budget बनाने में मदद करता हैं।

01. फ़िल्म की कहानी

02. फ़िल्म स्टार कास्ट

03. लोकेशन और शूटिंग

04. टेक्निकल टीम का ख़र्च

05. VFX और पोस्ट प्रोडक्श

06. फ़िल्म मार्केटिंग और प्रोमोशन

07. डिस्ट्रीब्यूशन और रिलीज़ खर्च

तो चलिए अब हर एक पॉइंट को डिटेल से समझते हैं कि कैसे किसी फिल्म का स्टोरी देखकर उसके सारे पॉइंट्स को निकाल कर हर पॉइंट्स पर कैसे डिस्कशन किया जाता है और  किस तरीके से एक प्रॉपर Film Budget तैयार किया जाता हैं।

फ़िल्म की कहानी ही मुख्य Blueprint होता हैं।

किसी भी फिल्म का अनुमानित बजट उसके कहानी को देखकर लगाया जाता है जो भी निर्देशक और निर्माता होते हैं वह यह देखते हैं कि इस फिल्म में टोटल कितने किरदार हो सकते हैं या है कितने लोकेशन पर यह शूट होना है किस तरह के दृश्य शूट करने पड़ेंगे

अगर कहानी एक छोटे शहर की होगी तो स्वाभाविक है कि उसमें पात्र भी कम होंगे, यानी कि कैरेक्टर्स भी कम होंगे तो उसका बजट कम हो सकता है वहीं अगर कोई ऐसी कहानी है जिसमें काफी मारधाड़ है, एक्शन फिल्में या फिर सुपर हीरो फिल्म है या फिर  पीरियड ड्रामा फिल्म है

अगर बड़े एक्शन सीक्वेंस शूट करने हैं तो स्वाभाविक रूप से इस फिल्म का बजट बड़ा हो जाता है इसलिए स्क्रिप्ट को ही अक्सर किसी भी फिल्म का बजट ब्लूप्रिंट भी कहा जाता है और इस तरह से यह सबसे पहला स्टेज होता है जहां पर एक अनुमानित बजट लगाया जाता है कि इस बजट में यह फिल्म बन सकती है जो फाइनल बजट नहीं होता है ते केवल एक अनुमानित बजट होता हैं कि फ़िल्म का जोनर, लोकेशन, करैक्टर, स्थान देखकर अनुमानित बजट तैयार किया जाता हैं।

स्टार कास्ट फ़ीस को देखकर

किसी भी फिल्म का बजट का लगभग 50% हिस्सा उसके स्टार कास्ट फीस में चला जाता है क्योंकि जब भी कोई बड़े बजट की फिल्म बनती है तो सबसे पहले स्टार के बारे में सोचा जाता है कि कौन सा स्टार होगा और उसका फ़ीस कितना होगा।

वही निर्माता और निर्देशक ये भी देखते हैं कि उस स्टार की मार्किट वैल्यू क्या हैं और उसको फ़िल्म में लेने से फ़िल्म की कमाई पर कितना असर पड़ेगा और Film Budget कितना हो सकता हैं

वही बहुत सारे स्टार्स अपने मार्केट वैल्यू को देखकर अपनी लोकप्रियता को देखकर फीस तय करते हैं वहीं कुछ और कलाकार ऐसे होते हैं जो फीस तो कम लेते हैं लेकिन वो फ़िल्म के प्रॉफ़िट शेयरिंग मॉडल पर काम करते हैं

यानी कि जो भी फिल्म का प्रॉफिट होगा उसका एक तय परसेंट वो स्टार लेगा, जैसे अल्लू अर्जुन ने पुष्पा जो फिल्म बनी थी उसमें उन्होंने लगभग 30% के पार्टनर थे इसी तरीके से स्टार फ़िल्म के बजट में सबसे बड़ा रोल निभाता है ।

अभी हाल ही में ख़बर आयी थी कि अक्षय कुमार अब प्रॉफ़िट शेयर मोडल पर काम करेंगे, वो फ़िल्म के प्रॉफ़िट में शेयर लेंगे, जो निर्माता के साथ डील होगी।

film budget प्लानिंग करते हुए निर्माता और प्रोडक्शन टीम

शूटिंग लोकेशन और सेट

किसी भी फिल्म के बजट में शूटिंग और लोकेशन एक हम हिस्सा होता है जिसके कारण फिल्म के बजट पर बहुत बड़ा असर पड़ता है जैसे फिल्म कहां शूट होगी इससे बजट में बहुत बड़ा अंतर आएगा अगर शूटिंग विदेश में करना है

तो वहां पर प्लेन से आना-जाना यानी कि ट्रैवलिंग होगा वहां के होटल के खर्च होंगे, परमिट वहां जाने के लिए परमिट जिसे हम वीजा बोलते हैं वह लेना पड़ता हैं, वहां जो स्थानीय यानी कि वहां का जो मूल निवासी, जो स्टाफ होंगे उसका ख़र्च को भी जोड़ा जाता हैं।

ज़्यादातर किस भी दूसरे देश मे शूट करने के लिके वहाँ के कुछ स्टाफ को रखना जरूरी होता है उसका खर्च अलग से जुड़ जाता है तो इस तरीके से यह बहुत अहम रोल निभाता है की शूटिंग का लोकेशन कहां है।

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वहीं कई बार वास्तविक लोकेशन के लिए परमिशन या किसी कारण से वो लोकेशन नही मिल पाता हैं तो अगर नहीं मिल पता हैं तो वैसा ही सेट एक स्टूडियो के अंदर तैयार किया जाता है और जिसमें शूट किया जाता है जिसकी लागत करोड़ों में होती है

तो यह भी बहुत इंपैक्ट डालता है बजट पर वही अगर तीसरी बात कर तो कोई पीरियड ड्रामा फ़िल्म हैं  अगर कोई फ़िल्म हैं तो उसमें पुराने जमाने का जो माहौल है वैसा माहौल बनाना बनाया जाता हैं । वैसे ड्रेस वेशभूषा कॉस्ट्यूम डिजाइन करवाना सेट तैयार करवाना पड़ता है जिसके कारण उसका बजट करोड़ों में जाता है 

तो ये भी एक पार्ट होता है किसी भी फिल्म का बजट तैयार करने में, वही अगर एक नॉर्मल कहानी है छोटे शहर की कहानी है या एक फैमिली ड्रामा फिल्म है तो उसका बजट बहुत कम होता है जैसे आपने फिल्म देखी होगी बहुत सारी ऐसी फिल्में है जैसे-  हम आपके हैं कौन, हम साथ साथ हैं 

ये फिल्म भी ऐसा नहीं ऐसा हैं कि छोटे बजट की फिल्म थी लेकिन जिस बजट ने आज फिल्में बनती हैं उस लिहाज़ से ये फिल्में काफी छोटे बजट की फिल्म थी क्योंकि ये एक फैमिली ड्रामा था एक ही घर, एक ही लोकेशन ज्यादा लोकेशन चेंज नहीं था तो इसका बजट बहुत कम होता है

उस हिसाब से देखे तो स्टार कास्ट के बाद सबसे ज्यादा खर्च शूटिंग लोकेशन और सेट डिज़ाइन पर  ख़र्च होता है और इसको ध्यान रखते हुए किसी भी फिल्म का बजट बनाया जाता हैं।

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टेक्नीशियन और क्रू मेंबर्स

वहीं अब बात करें किसी फिल्म को बनाने के लिए केवल स्टार्स की जरूरत नहीं होती है बल्कि जरूरत होती है एक टेक्निकल टीम की जिसमें शामिल होता है निर्देशक, सिनेमैटोग्राफर, एडिटर, आर्ट डायरेक्टर, कस्टम डिजाइनर, मेकअप , आर्टिस्ट और  साउंड इंजीनियर जैसे विशेषज्ञ की ज़रूरत होती हैं। इन सबके बजट को देखकर ही Film Budget प्लानिंग की जाती हैं

ये जितने भी टेक्निशियन होते हैं वह अपने काम में एक्सपर्ट होते हैं स्पेशलिस्ट होते हैं जिसके कारण उनका बजट भी बहुत हाई होता है वैसे अगर आप चाहे तो और दूसरे को भी चुन सकते हैं जिनके पास एक्सपीरियंस कम हैं, तो उनका बजट कम होगा लेकिन एक अच्छी फिल्म बनाने के लिए, जिसमें बड़ा स्टार हैं तो अच्छे टेक्नीशियन की भी ज़रूरत होती हैं।

एक स्टार तभी काम करता है जब उसके साथ एक अच्छा टेक्नीशियन टीम होता है तभी वह काम भी करता है, उस लिहाज़ से टेक्निकल टीम और क्रू मेंबर्स भी फ़िल्म के बजट का मुख्य पार्ट होता हैं।

एक्शन VFX और स्पेशल इफेक्ट्स

आज के दौर में जो फिल्में बनती है जिस तरह की फिल्में बनाई जाती है उसमें VFX( वीएफएक्स) और स्पेशल इफेक्ट्स का काफी महत्व बढ़ गया है बड़े एक्शन सीन हो या कोई विस्फोट करना हो, या कोई काल्पनिक दुनिया दिखाने हो, या सुपर हीरो जैसा कोई कैरेक्टर तैयार करना हो, जैसे क्रिष का ऋतिक रोशन, या रोबोट का राजनीकांत।

तो ये सारे काम कंप्यूटर ग्राफिक्स के द्वारा किया जाता है और इसको तैयार करने में महीनों का समय लगता है जिसमें काफी बड़ी टीम होती है जितना अधिक वीएफएक्स और एक्शन होता है बजट उतना ही बढ़ता चला जाता है यही कारण है कि कई बड़ी फिल्मों का बजट आज बहुत ज्यादा होता है, तो ये भी एक अहम पार्ट  होता है किसी भी फिल्म के बजट को बनाने में।

पोस्ट प्रोडक्शन का काम

किसी भी फिल्म की शूटिंग के बाद उसका सबसे बड़ा काम जो होता है वह होता है Post Production जिसके अंतर्गत Editing की जाती है Dubbing होती है बैकग्राउंड म्यूजिक लगाया जाता है साउंड को डिजाइन किया जाता है, उसके बाद फिल्म का कलर ग्रेडिंग की जाती हैं।

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विजुअल इफेक्ट्स ( Visual Effects) डाले जाते हैं फोली होता है जैसे- कोई चीज गिरा तो उसकी आवाज वहां पर डालना, इन सब काम का काफी लंबी प्रक्रिया होता है काफी इसमें टाइम लगता है और ये सारे काम भी काफी महंगे होते हैं

क्योंकि अगर आप अच्छे क्वालिटी के काम करोगे तो पैसा तो खर्च होता ही है तो यह भी एक आम पार्ट होता है किसी फिल्म के बजट को डिजाइन करने में, किसी भी फिल्म का अच्छे से पोस्ट प्रोडक्शन ही फिल्म के गुणवत्ता को और बेहतर बनाता है।

क्योंकि शूटिंग के बाद वो केवल रॉ मटेरियल  ही होता हैं, पूरी फ़िल्म पोस्ट प्रोडक्शन में ही तैयार की जाती हैं जिसे पब्लिक के सामने दिखाया जाता हैं।

फ़िल्म मेकिंग को बेसिक 3 पार्ट्स में बांटा जाता हैं

कोई भी निर्माता जब Film Budget बनता हैं तो वो शुरू में बेसिक तीन पार्ट का मोटे तौर पर बात करता हैं

1 . Pre- Production 2 . Production 3. Post Production

प्री प्रोडक्शन का मतलब होता हैं शूटिंग से पहले का काम जैसे – राइटर को साइन करना, कहानी फाइनल करना , एक्टर्स को साइन करना, गाना रिकॉर्ड करना, ये सरे काम होते हैं | वही फिल्म की जो पूरी शूटिंग को प्रोडक्शन कहा जाता हैं और शूटिंग के बाद का सारा काम जैसे – एडिटिंग,डबिंग, मिक्सकिंग , सेंसर और रिलीज़ तक का सारा काम पोस्ट प्रोडक्शन में आता हैं |

तो कोई भी निर्माता Film Budget बनाते समय मोटे तौर पर बजट को तीन पार्ट में बाँट देता हैं उसके बाद एक एक डिपार्टमेंट के अनुसार Movie Budget बनता हैं ताकि उसे एक बेसिक आईडिया हो जाता हैं की कितना बजट हो सकता हैं अनुमानित

फिल्म मेकिंग को गहराई से समझने के लिया आप इस बुक को पढ़ सकते हो –COLLABORATIVE ART OF FILMMAKING : FROM SCRIPT TO SCREEN, 3RD EDITION

मार्केटिंग और प्रोमोशन

अब इतना सब कुछ हो जाने के बाद फिल्म तैयार हो जाती है उसके बाद जो खर्च आता है वह मार्केटिंग और प्रमोशन में आता है क्योंकि फिल्म बनाना ही केवल पर्याप्त नहीं होता हैं फ़िल्म को Audiance तक जानकारी भी पहुँचाना होता हैं फिल्म की जानकारी जब तक नहीं पहुंचेगी तब तक थिएटर तक लोग नहीं आएंगे ।

इसके लिए ट्रेलर लॉन्च किया जाता है सोशल मीडिया प्रमोशन किया जाता है इंटरनेट पर वीडियो क्लिप डाले जाते हैं तरह-तरह से प्रचार किया जाता है टीवी शो के जरिए प्रमोशन होता है प्रेस कॉन्फ्रेंस किया जाता है टीवी पर ऐड दिया जाता है और इस सब पर काफी ज्यादा खर्च होता है जो करोड़ों में होता है

कई बार तो एक फिल्म के बजट के लगभग मार्केटिंग का बजट भी हो जाता है इस लिहाज से जो निर्माता हैं वो फिल्म के प्रमोशन का बजट अलग से निर्धारित करते हैं ताकि इस बजट में ऐड ना हो और बजट बहुत ज्यादा ना दिखे

हालांकि फ़िल्म का जो बजट निर्धारित होता है ज्यादातर मामलों में उस बजट का एक हिस्सा या कुछ परसेंट कहे तो प्रमोशन पर भी खर्च किया जाता है लेकिन यह करोड़ों में होता है अगर फिल्म बड़े बजट और बड़े स्टार कास्ट की है तो प्रोमोशन भी करोड़ो में होता हैं।

फिल्म बजट ब्रेकडाउन जिसमें कलाकार, लोकेशन, VFX और मार्केटिंग खर्च शामिल हैं

Distribution और रिलीज़ ख़र्च

अब आता है फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन और रिलीज का खर्चा फिल्म को सिनेमा घर या ओटीटी प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में भी काफी सारा खर्च आता है थियेटर रिलीज के लिए जो डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों होती है डिजिटल प्रिंट के लिए या फिर जो प्रचार के लिए जो सामान लगता है इन सब पर भी काफी खर्च किया जाता हैं और ये भी Film Budget का ही पार्ट होता हैं

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अगर फिल्म कई भाषाओं में रिलीज होनी है तो डबिंग करने का खर्च अलग से आता है फिर उसके बाद सब टाइटल का खर्च अलग से आता है इसलिए यह भी एक बहुत अहम पार्ट होता है और इसका भी बजट काफी करोड़ों में होता है।

जैसे आपने पुष्पा या फिर साउथ की कोई भी फिल्में देखी होगी तो उसका डबिंग हिंदी में किया जाता है अलग-अलग लैंग्वेज जैसे अगर वह तमिल है तो तेलुगु में मलयालम में हिंदी में इंग्लिश में अलग-अलग भाषाओं में डब किया जाता है फिर उसका सब टाइटल किया जाता है इसलिए टाइम टेकिंग भी होता है और इसमें भी काफी अच्छा खर्च आता हैं।

Contingency Budget ( आपातकालीन बजट )

फिल्म निर्माण में कई बार Untoward Incident भी होता है जिसे हम अब अप्रत्याशित परिस्थितियों भी कह सकते हैं कभी मौसम खराब हो जाता है तो शूटिंग रुकनी पड़ती है, किसी कलाकार यानी कि जो बड़े स्तर है अगर उनकी तारीख नहीं मिलती है जिसके कारण भी शूटिंग कई दिनों तक रुक जाती हैं।

या फिर कोई टेक्निकल प्रॉब्लम आ जाता है या किसी जो ग्रुप मेंबर है उसकी तबीयत खराब हो जाती है या किसी Stars की तबीयत खराब हो गई जिसके कारण भी फिल्में रुक जाती है जिसके कारण निर्माता को नुकसान होता है उस नुकसान से बचने के लिए कुछ अतिरिक्त बजट भी रखा जाता हैं जिसे आपातकालीन बजट कहा जाता हैं। हलाकि ये Film Budget का हिस्सा होता हैं लेकिन यदा कदा ही ऐसे खर्च करने पड़ते हैं

ये भी फ़िल्म बजट का ही एक हिस्सा होता हैं जो बजट में मेंशन किया जाता हैं अगर ज़रूरत हुई तो ख़र्च होता हैं नही तो ख़र्च नही होता हैं। के बार आपने सुना होगा किसी टेक्नीशियन या Stunt Man की किसी शूट में जान भी चली जाती हैं तो उसका भी भरपाई निर्माता को करना पड़ता हैं।

बजट को अंतिम मंज़ूरी

आमतौर पर फिल्म निर्माण के लिए कोई निर्माता यानी की प्रोड्यूसर स्टूडियो या कोई जो निवेश करना चाहता है या फिर कभी-कभी जो डिस्ट्रीब्यूटर होता है वह भी साझेदार बनता है फिल्म को बनाने में और अंतिम बजट को मंजूरी देने में।

उन्हें लगता है कि अगर इस फिल्म में अच्छा बजट लगाने के बाद अगर कमाई की संभावना ज्यादा है तो वह उसमें पैसे Invest करते हैं और इस तरह से फिल्म के संभावित कमाई का विश्लेषण करने के बाद फिल्म का बजट तैयार किया जाता है।

उस लिहाज से कहे तो Film Budget तय करना केवल खर्चों का आकलन करना नहीं होता है बल्कि व्यावसायिक यानी की कमर्शियल निर्णय का भी मामला होता है कि इसमें कितना ख़र्च होगा और क्या अगर इनवेस्ट करने के बाद क्या प्रॉफिट हो सकता है उस हिसाब से भी लोग इसमें सहायक बनते हैं लेकिन जनरली कोई निर्माता या कोई स्टूडियो ही ज्यादातर फिल्मों में इनवेस्ट करता है फिल्म बनाने के लिये।

फिल्म बजट के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें

निष्कर्ष –

इस तरह कह सकते हैं की कि Film Budget बनाना केवल केवल ख़र्चों की सूची तैयार करना नहीं होता हैं ये एक Commercial स्टेप्स हैं जिसमे सभी संभावित विषयों पर बात किया जाता हैं किसी भी फिल्म का बजट मुख्यतः उसकी Story , Lead Actorts, Location, Technicians, Porperies, Post Production, और Marketing जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर बनाया जाता हैं यही सबसे बड़ा कारण होता हैं की किस दो फिल्मो की कमाई Same हो सकता हैं लेकिन बजट अलग अलग |

आज के दौर में फिल्म निर्माण केवल Entertainment के लिए नहीं किया जाता हैं बल्कि ये पूरी तरह एक व्यवसायिक प्रकिया बन गया हैं जहाँ फिल्म से अरबो की कमाई की जाती हैं जो निर्माता होता हैं वो पुरे खर्च का अनुमान लगाकर ये सुनिश्चित करता हैं की फिल्म की लागत और आय को ध्यान में रखकर ही बजट का निर्धारण करता हैं |

मैंने जब अपनी एक रीजिनल फ़िल्म बनाई थी तो मुझे बजट ४० लाख बताया गया था लेकिन बाद में मेरा ५५ लाख खर्च हुआ, जबकि सारी बात होने के बाद, इसलिए जो भी बजट फाइनल होता हैं उससे कुछ अमाउंट ज़्यादा ही निर्माता सोच के रखता हैं तो फ्रेंड्स ये था किस व्ही फिल्म का बजट बनाने का तरीक़ा, उम्मीद करता हु आपको ये पोस्ट पसंद आया होगा अगर ये पोस्ट अच्छा लगा हो तो कृपया एक लाइक ज़रूर करे साथ ही ऐसे ही और नए कंटेंट के लिए हमारे इस ब्लॉग को सब्सक्राइब और कमेंट ज़रूर करें| चलिए मिलते हैं एक नए पोस्ट के साथ तबतक के लिए स्वस्थ्य रहिये मस्त रहिये जय हिन्द जय भारत | धनयवाद

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