Franchise फिल्में बार-बार क्यों बनती हैं? जानिए बॉलीवुड और हॉलीवुड का सबसे सफल बिज़नेस मॉडल

ravi

फ्रैंड्स आज के इस पोस्ट में बात करने वाले हैं की Franchise फिल्में बार-बार क्यों बनती हैं आखिर क्या करना हैं की आजकल बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में फ्रैंचाइज़ फ़िल्में लगातार बनाई जा रहे हैं क्या आपने कभी सोचा हैं की आखिर क्यों बनाई जाती हैं पुरानी फिल्मों का सीक्वल, आज जानेगे विस्तार से इसके पीछे की सच्चाई | वही बात करेंगे बॉलीवुड , साउथ इंडस्ट्री और हॉलीवुड में सीक्वल और फ्रेंचाइज़ फिल्मों के पीछे का बिज़नेस मॉडल, फायदे, जोखिम और दर्शकों की भूमिका।

आख़िर Franchise फिल्में बार-बार क्यों बनती हैं?

पिछले कुछ वर्षों में अगर आपने गौर किया होगा तो आपने देखा होगा की बॉलीवुड ही नहीं साउथ और हॉलीवुड में भी सिक़्वल फिल्में बनाई जा रही हैं आज दर्शक सिंघम‘, ‘भूल भुलैया’, ‘हाउसफुल’, ‘धूम’, ‘कृष’, ‘स्ट्री’, ‘पुष्पा’, ‘बाहुबली’ जैसी फिल्मों के अगले भाग का इंतजार करते हैं। वहीं हॉलीवुड में Marvel Cinematic Universe, Fast & Furious, Mission: Impossible और Avatar जैसी फ्रेंचाइज़ लगातार नई फिल्में ला रही हैं।

लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल ये हैं की इसके पीछे क्या कारण हैं क्यों Franchise फिल्में बार-बार क्यों बनती हैं? क्या इसके पीछे केवल दर्शकों की मांग है या फिर यह फिल्म इंडस्ट्री का एक बड़ा बिज़नेस मॉडल है? हर कोई जो भी फ़िल्म में इंट्रेस्ट रखते हैं वो जानना चाहते हैं इसके पीछे की सच्चाई, क्या नई कहानी नहीं मिल रही हैं या कारण कुछ और हैं आइये विस्तार से समझते हैं।

फ्रेंचाइज़ फिल्म और सीक्वल फिल्मों का उदाहरण

क्या होती हैं Franchise फिल्में ?

फ्रेंचाइज़ फ़िल्म वो होती हैं जिसके अंतर्गत एक ही कहानी, पात्र, दुनिया या ब्रांड को आगे बढ़ाते हुए कई फिल्में बनाई जाती हैं। जैसे-

सिंघम → सिंघम रिटर्न्स → सिंघम अगेन

भूल भुलैया → भूल भुलैया 2 → भूल भुलैया 3

पुष्पा → पुष्पा 2 → आगे की संभावित फिल्में

इन फिल्मों का उद्देश्य पहले से बने दर्शक वर्ग को दोबारा थिएटर तक लाना होता हैं क्योकि इसके लिए निर्माता को ज़्यादा मेहनत करने की ज़रूरत नहीं होतीं हैं इन फिल्मो का दर्शक पहले से ही बना होता हैं क्योकि जो फ़िल्में पहले से सुपर हिट होती हैं उसी का सिक़्वल बनाया जाता हैं | इसके कई सारे फ़ायदे होते हैं |

इन्हें भी पढ़ेंमल्टीस्टार फिल्मों के पीछे की सच्चाई

01. पहले से तैयार ऑडियंस मिल जाती हैं

बात करें फ्रेंचाइज फिल्मों का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि किसी भी निर्माता को नए सिरे से दर्शक बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती है जब किसी फिल्म का पहला भाग सुपरहिट हो जाता है तो दर्शक उसके पात्रों और कहानी से ऐ जुड़ जाते हैं और वो अगली फ़िल्म की घोषणा का इंतज़ार करते रहते हैं ।

जैसे ही ऐसी फिल्म का अनाउंसमेंट होता है तो वह काफी उत्साहित होते हैं और वह इंतजार करने लगते हैं कि कब यह फिल्में रिलीज होगी, जैसे किसी दर्शक को पहली फिल्म पसंद आ जाती है तो उसका अगला भाग देखने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है यही कारण है कि आज जो फिल्म निर्माता है जो भी मेकर्स हैं वह फ्रेंचाइजी मॉडल को कम जोख़िम वाला निवेश भी मानते हैं और इसीलिए इस तरह की ज्यादा फिल्में बनाई जा रही हैं।

02. फ़्रेंचाइज़ फिल्मों के मार्केटिंग पर ख़र्च बहुत कम आता हैं

फ्रेंचाइज फिल्म बनाने का सबसे बड़ा फायदा एक यह भी होता है की मार्केटिंग पर बहुत ही कम खर्च आता है क्योंकि नई फ़िल्म को दर्शक तक पहुंचाने के लिए निर्माता को मार्केटिंग ज़्यादा नहीं करनी पड़ती है फ्रेंचाइज  फिल्मों के साथ स्थिति बहुत ही अलग होती हैं।

फ्रेंचाइज़ फिल्मों के पीछे बॉक्स ऑफिस और बिजनेस रणनीति

फ़िल्म का नाम ही उसका विज्ञापन बन जाता है जैसे- हाउसफुल 5′ धूम 4′ सिंघम अगेन’ अभी आने वाली कई सारी ऐसी फिल्में है जैसे ग़दर 2 आई थी बॉर्डर 2, इस टाइप की जो फिल्में है क्योंकि पहले से टाइटल काफी हिट होता है फिल्में सुपरहिट होती है ऑडियंस पहले से जुड़ी होती हैं।

इसलिए Makers को इस पर ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं होती है जैसे ही फिल्म का अनाउंसमेंट होता है तो दर्शक  पहले से ही एक्टिव हो जाते हैं उस फिल्म का इंतजार करते हैं की फिल्में कब रिलीज होगी।

03. बॉक्सऑफिस रिस्क बहुत कम हो जाता हैं

जैसा कि हमने अपने कल के पोस्ट में ही बात किया था की फिल्म निर्माण एक जोखिम भरा व्यवसाय है कई बार बड़े-बड़े स्टार्स की फिल्में भी फ्लॉप हो जाती है लेकिन जब किसी सफल ब्रांड या फ्रेंचाइज की अगली फिल्म बनाई जाती है तो जो भी इन्वेस्टर ,डिस्ट्रीब्यूटर  उनको पहले से काफी भरोसा होता हैं फ़िल्म के रिकॉर्ड को लेकर।

यही कारण है कि निर्माता अक्सर नई कहानी पर करोड़ों रुपए खर्च करना या फिर से नए सिरे से दर्शक को बताना, Audiance तक अपनी पहुंच बनाना नही पड़ता हैं यही वज़ह हैं कि नई कहानी और करोड़ों ख़र्च करने से एक सफल फ्रेंचाइज फिल्म को बनाना ज्यादा पसंद करते हैं।

इन्हें भी जाने फ़िल्म निर्माण में सबसे बड़ा रिस्क कौन लेता हैं ?

04. Merchandise और Brand Value बढ़ती है

आज फिल्मों की कमाई केवल बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं रहती है फिल्मी कई तरह आज की फिल्में कई अलग-अलग स्रोतों से कमाई करती है जब से सोशल मीडिया OTT का जमाना आया है तो कमाई की कई सारे स्रोत बन गए हैं जैसे

ओटीपी राइट

सैटेलाइट राइट्स

म्यूजिक राइट्स

मर्चेंडाइज

ब्रांड कोलैबोरेशन

जब कोई फ्रेंचाइज लोकप्रिय हो जाती है तो उसकी ब्रांड वैल्यू कई गुना तक बढ़ जाती हैं और यही सबसे बड़ा कारण होता है कि जितने भी बड़े स्टूडियो या निर्माता हैं वो लंबे समय तक किसी फ्रेंचाइज को जीवित रखना चाहते हैं।

05. किरदार ही दर्शक की पहचान बन जाती हैं

जब कोई फिल्में सुपरहिट हो जाती है और उसकी फ्रेंचाइज फिल्में जब बनाई जाती है तो कुछ करेक्टर्स ऐसे हिट हो जाते हैं इतने लोकप्रिय हो जाते हैं कि दर्शक उन्हें बार-बार देखना चाहते हैं जैसे – 

एक उदाहरण से समझते हैं सिंघम हो पुष्पा हो चुलबुल पांडे हो स्त्री यूनिवर्स के पात्र हो ये सब ऐसे कैरेक्टर से जिन्हें लोग बार-बार देखना चाहते हैं जब किसी किरदार के प्रति इमोशनल जुड़ाव बन जाता है तो उसके नई रोमांच देखने के लिए दर्शक थिएटर तक जाने को उत्सुक रहते हैं।

अगर आप जानना चाहते हैं कि सफल फिल्म फ्रेंचाइज़ की मजबूत कहानियां कैसे लिखी जाती हैं, तो यह Screenplay by Syd Field किताब पढ़ सकते हैं।

दर्शकों के बीच फ्रेंचाइज़ फिल्मों की लोकप्रियता

06. OTT प्लेटफॉर्म के कारण फ़्रेंचाइज़ की ताक़त बढ़ी हैं

OTT के आने से जो फ्रेंचाइजी फिल्में है उनकी ताकत कई गुना बढ़ गई है जैसे अगर एक फिल्म सुपरहिट हो जाती है और कोई दर्शक उसे नहीं देख पता हैं और जब उस फिल्म की फ्रेंचाइजी फिल्म बनती है तो वो कोशिश करता हैं की ओटीटी पर जाकर पहले पार्ट को देखने की, ताकि उसको दूसरा पाठ देखने में मजा आये और कहानी भी समझ आये।

07. Audiance को Familiar Content पसंद आता हैं

यह नेचुरल है कि किसी भी इंसान का मन जो है वह स्वाभाविक रूप से जो पहले से परिचित चीजों के प्रति काफी आकर्षित होता है जब दर्शक किसी फिल्म के करैक्टर या कहानी को पहले से जनता हैं या फिर यूं कहें कि जो फिल्में बनी हैं।

और  अगर वो पहले से उसके सारे कैरेक्टर से परिचित है तो उसे वह फिल्म देखने में ज्यादा मजा आएगा, यही कारण हैं फ़्रेंचाइज़ फ़िल्म को इसी मनोवैज्ञानिक कारण से शुरुआत में काफ़ी अच्छी बढ़त मिल जाती हैं।

इसे भी जानेIPRS क्या होता हैं और क्यों देती हैं रॉयल्टी

क्या फ़्रेंचाइज़ फिल्में हमेशा सफ़ल होती हैं

इसका सीधा सा जवाब है नही, सिर्फ किसी भी फिल्म के नाम या ब्रांड के भरोसे फिल्में सफल नहीं होती है जब तक की कहानी दमदार ना हो, कंटेंट मजेदार ना हो, और पब्लिक का मनोरंजन ना हो, तो इस तरह से यानी की फ्रेंचाइजी फिल्म से उम्मीद करना कि यह फिल्म हिट ही होगी, गलत साबित हो सकता हैं।

फ़्रेंचाइज़ मॉडल के कुछ नुक़सान भी हैं

  1. Creativity का कम होना
  2. Audianc ऊब सकती हैं
  3. Content कमज़ोर हो सकता हैं

इस तरह की फ्रेंचाइज फिल्मों के कुछ नुकसान भी है जैसा कि मैं ऊपर बताया हैं क्रिएटिविटी के नाम पर केवल फॉर्मल काम किया जा सकता हैं, प्रॉपर वो पुरानी क्रिएटिविटी देखने को नहीं मिलती है बहुत बार ऐसा होता कि दर्शक एक ही तरह की कहानी को बार-बार देखकर ऊब  सकता है और वह दोबारा देखने की कोशिश नहीं करता हैं

इन्ही सब कारणों से बड़ी फिल्में जिसका सिक़वल बनाई जाती है कई बार दर्शक को निराश करती है और फिल्म का बिजनेस भी काफी कमजोर साबित होता हैं।

बॉलीवुड में फ़्रेंचाइज़ फिल्मों का भविष्य

बता दे की आने वाले कुछ वर्षों में खासकर बॉलीवुड में फ्रेंचाइज फिल्मों की संख्या और भी बढ़ सकती है इसके  कुछ कारण है क्योंकि इसमें जोखिम कम होता हैं, ब्रांड वैल्यू पहले से बनी होती हैं, बेहतर मार्केटिंग पहले से होती है और मार्केटिंग पर खर्च कम करना पड़ता हैं  वही ओटीपी का सपोर्ट मिलता हैं।

वही दर्शक भी पहले से बनी होती है जिसके कारण यह जो बिजनेस मॉडल है फिल्म बनाने का फ्रेंचाइज मॉडल आने वाले समय में भी बना रह सकता है हालांकि सफ़ल वही फ्रेंचाइजी फिल्में होंगी जिसके अंदर कंटेंट अच्छा हो,दमदार होगा हर पार्ट में कुछ नया देखने को मिलेगा,पब्लिक को रोमांचित करने वाला कंटेंट होगा तभी जाकर फिल्में हिट होगी अन्यथा फ्रेंचाइजी लाख ब्रांड हो फिल्में हिट नहीं हो सकती।

फिल्म फ्रेंचाइज़ और हिट फिल्मों के स्टोरी स्ट्रक्चर को समझने के लिए लोकप्रिय किताब मानी जाती है। Save the Cat! The Last Book on Screenwriting इन्हें भी आप पढ़ सकते हो

Disclosure: This post contains affiliate links. If you purchase through these links, we may earn a small commission at no extra cost to you.)

निष्कर्ष

Franchise फिल्में बार-बार क्यों बनती हैं? इसका सबसे बड़ा जवाब है बिज़नेस और दर्शकों का भरोसा।

जब कोई फिल्म सफल हो जाती है तो वह केवल एक कहानी नहीं रहती, बल्कि एक ब्रांड बन जाती है। निर्माता उसी ब्रांड की लोकप्रियता का फायदा उठाकर अगली फिल्में बनाते हैं। इससे जोखिम कम होता है, कमाई की संभावना बढ़ती है और दर्शकों को उनके पसंदीदा पात्रों से दोबारा मिलने का मौका मिलता है।

लेकिन अंत में किसी भी फ्रेंचाइज़ की असली ताकत उसका नाम नहीं, बल्कि उसकी कहानी होती है। यदि कहानी मजबूत होगी तो दर्शक हर बार थिएटर आएंगे, और यदि कहानी कमजोर हुई तो सबसे बड़ी फ्रेंचाइज़ भी दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पाएगी।

तो फ्रेंड्स उम्मीद करता हूँ की आपको समझ आया होगा की की आखिर क्यों बड़ी बड़ी फिल्मों की फ़्रेंचाइज़ बनाई जाती हैं इस विषय को लेकर आपकी क्या राय हैं अपनी रे कमेंट ज़रूर करे साथ अगर वाकई में पोस्ट Useful लगा हो तो एक लाइक ज़रूर करें इससे हमे भी मोटिवेशन मिलता हैं और भी नए नए कंटेंट आप तक पहुंचाने में |

अगर इस पोस्ट से सम्बंधित कोई भी सवाल या सुझाव देना चाहते हैं तो आप हमें Instagram पर भी फॉलो कर सकते हैं और अब आप बताये आपको किस टाइप का किस विषय पर आर्टिकल चाहिए ताकि मैं कोशिश करू आप तक लेन का | चलिए मिलते हैं नए जोश और पोस्ट के साथ तबतक के लिए स्वस्थ्य रहिये , मस्त रहिये , जय हिन्द जय भारत | धन्यवाद

Share This Article
Leave a comment