किसी भी फिल्म इंडस्ट्री में चाहे वह बॉलीवुड हो साउथ इंडस्ट्री हो या फिर हॉलीवुड की फिल्में हो हर जगह कई बार निर्माता एक फिल्म में कई सारे सितारे को कास्ट करते हैं जिसे हम Multistar Film Business Model कहते हैं और आखिर निर्माता क्यों इतने सारे स्टार को एक साथ एक फिल्म में क्यों लेते हैं इसका क्या फायदा होता है क्या नुकसान होता हैं। आज के इस पोस्ट में इसी पर जानेगे विस्तार से।
इसका सबसे पहला कारण तो यह है कि दर्शक के लिए काफी फायदेमंद होता है आकर्षण का केंद्र होता है क्योंकि उन्हें एक ही फिल्म में अपने कई सारे पसंदीदा कलाकारों को देखने का मौका मिलता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि निर्माता आखिर करोड़ों रुपया खर्च करके इतने कलाकार को एक साथ क्यों लेते हैं और इसमें उनका क्या फ़ायदा होता हैं।
इसका सबसे सीधा और आसान सा जवाब यह है कि मल्टीस्टार फिल्म बिजनेस मॉडल में, इस तरह की फिल्में केवल मनोरंजन का साधन नहीं होता है बल्कि एक सोची समझी व्यावसायिक रणनीति होती हैं तो आज समझते हैं कि आखिर मल्टी स्टार फिल्म का बिजनेस मॉडल काम कैसे करता है और ये किसी भी फिल्म इंडस्ट्री के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता हैं।
मल्टी स्टारर फिल्म क्या होती है?
सबसे पहले जानते हैं कि मल्टी स्टार फिल्म होती क्या हैं ? जब किसी भी एक फिल्म में कई सारे बड़े स्टार्स को एक साथ लिया जाता है और फिल्में बनाई जाती है तो उसे हम मल्टी स्टार फिल्म कहते हैं।
आपने बॉलीवुड ही नहीं साउथ या हॉलीवुड की भी फिल्में देखी होगी जिसमें एक फिल्म में कई सारे स्टार एक साथ काम करते हैं और इनका उद्देश्य केवल ये होता है कि अलग-अलग दर्शकों के अलग-अलग वर्गों को आकर्षित करना।
मल्टी स्टार फिल्म का चलन आज से नहीं है कई दशकों से चला आ रहा है और निर्माता इस फार्मूले का उपयोग इसलिए करते हैं क्योंकि इससे उनके फिल्म की मार्केट वैल्यू बढ़ जाती है जब एक साथ कई स्टार्ट होते है तो सबके अपने-अपने फैंस होते हैं जिसके कारण उनकी फिल्म का जो मार्केट वैल्यू बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं।

Multistar Film Business Model कैसे काम करता है?
देखिए मल्टी स्टार फिल्म का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि एक फिल्म में कई सारे स्टार्स होते हैं और किसी एक स्टार पर फ़िल्म निर्भर नहीं होती हैं, मान लीजिए एक फिल्म में कई सारे स्टार्स हैं दो या दो से अधिक,यदि एक स्टार के प्रशंसक आते हैं वहीं दूसरे स्टार्स के भी Fans थिएटर में पहुंचते हैं तो संभावित ऑडियंस दुगनी हो जाती हैं।
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वही कभी-कभी ऐसा भी होता है कि दो स्टार के जगह तीन स्टार है और दो के ऑडियंस फ़िल्म देखने आ रहे हैं तो भी कम से कम प्रोड्यूसर को तो ऑल मोस्ट फायदा ही होता, की कम से कम ऑडियंस दोगुनी होती हैं।
उदाहरण के लिए अभी एक फिल्म आई थी War 2 जिसमें रितिक रोशन के साथ जूनियर एनटीआर थे तो जूनियर एनटीआर साउथ से बिलॉन्ग करते हैं उनके अपने फैन बेस हैं वही ऋतिक रोशन का अपना, तो जब दो ऐसे स्टार काम करते हैं साथ में तो फ़िल्म बड़े स्केल पर देखी जाती हैं।
क्योंकि मान लीजिए अगर War 2 में केवल रितिक रोशन होते तो केवल हिंदी बेल्ट ऑडियंस ज्यादातर बॉलीवुड ऑडियंस फ़िल्म देखने जाती वहीं जूनियर एनटीआर को लेने से साउथ के भी लोग उसे फिल्म को देखा जिसे प्रोड्यूसर को बड़ा फायदा फ़ायदा होता हैं।
तो शायद अब आपको समझ आया होगा कि क्यों Multistar Film Business Model क्या होता हैं और इसपर क्यों काम किया जाता हैं और ये निर्माता की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती हैं। अब बात करते हैं इसके Pros and Cons की।
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बड़ी ऑडियंस तक पहुँच
इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि के सारे स्टार होने के कारण जैसा मैंने पहले बताया कि काफी सारे ऑडियंस एक साथ थिएटर में आते हैं तो इसमें बहुत ज्यादा चांस होता है कि फर्स्ट वीक में ही फिल्म अच्छा खासा रिकवरी कर सकती है बॉक्स ऑफिस पर इसलिए मल्टी स्टार फिल्म बनाई जाती हैं।
बॉक्सऑफिस रिस्क कम करना
जैसा कि मैंने अपने पिछले पोस्ट में ही बात किया था की फिल्म बनाना एक जोखिम का काम पहले से ही होता है लेकिन जब मल्टी स्टार को कास्ट किया जाता है तो बॉक्स ऑफिस रिस्क को कम किया जाता है क्योंकि अलग-अलग एक्टर्स के अपने फैंस बसे होते हैं तो नुकसान होने का बहुत कम चांस होता हैं।
क्योंकि कई सारे कलाकार एक साथ फिल्में में होने से निर्माता को अतिरिक्त सपोर्ट मिलता है जिसके कारण बॉक्स ऑफिस पर फिल्में ठीक-ठाक प्रदर्शन करती है और प्रोड्यूसर को इससे ज्यादा फायदा होता हैं।
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सैटेलाइट और OTT डील मज़बूत होता हैं
आज जिस दौर में फिल्में बनाई जाती है उसमें केवल बॉक्स ऑफिस पर टिकट बेचकर फिल्में ज्यादातर मुनाफा नहीं कमाती है आज सैटेलाइट राइट्स, डिजिटल राइट्स, म्यूजिक राइट्स और OTT डील्स काफी महत्वपूर्ण बन चुके हैं जिसके कारण ये एक कमाई का सबसे बड़ा स्रोत भी बन चुका हैं।
जब किसी फिल्म में कई बड़े एक्टर्स होते हैं तो टीवी चैनल ओटीटी प्लेटफॉर्म्स जयादा रुचि दिखाते हैं फिल्म को खरीदने में जिससे प्रोड्यूसर को डील मिलने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं।
मार्केटिंग में मल्टी स्टारर फिल्मों का फायदा
मल्टी स्टार फिल्म होने का एक अपना अलग फायदा होता है क्योंकि इससे मार्केटिंग में बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है जब एक फिल्म में कई सारे एक्टर्स होते हैं तो उनका प्रचार यानी कि उनका जो प्रमोशन काफी बड़ा हो जाता है हर एक्टर अपने-अपने सोशल मीडिया हैंडल से फिल्म को प्रमोट करते हैं इंटरव्यू देते हैं ।
जिसके कारण फिल्म को अतिरिक्त पब्लिसिटी मिलती है और दर्शकों के बीच फिल्म के बारे में रुचि बढ़ती है दर्शक उस फिल्म को पहले से जानने लगते हैं ऑडियंस का थिएटर तक पहुँचने का चांस बहुत ज्यादा बढ़ जाता है यही कारण है कि Multistar Film Business Model में मार्केटिंग का बहुत बड़ा हिस्सा माना जाता है और इसका एक अहम रोल माना जाता हैं।
Multi Star फ़िल्म के लिए चुनौति
देखिए हर सिक्का का दो पहलू होता है अगर कहीं बेनिफिट हो सकता है तो लॉस होने के भी उतनी संभावना होती है जितना बड़ा रिस्क उतना बड़ा रिवॉर्ड भी होता है तो जिस तरीके से कोई निर्माता ज्यादा स्टार लेता हैं तो कई तरह के उनको फायदे होते हैं ऑडियंस ज्यादा आती है OTT, डिजिटल राइट्स और सैटेलाइट राइट्स ज्यादा महंगे बिकने के चांस होते हैं ।
सारे प्लेटफार्म फ़िल्म खरीदने में इंटरेस्ट दिखती हैं लेक़िन अगर स्टार ज्यादा होता है तो उनका पेमेंट बहुत बड़ा होता है तो फिल्म का बजट भी बहुत बड़ा हो जाता है अगर कहीं किसी कारण से फिल्में नहीं चली बड़े स्टार होने के बावजूद तो प्रोड्यूसर को बड़ा नुकसान होता है और ऐसे कई सारे उदाहरण से देखे गए जिसमें एक दो नही, चार पांच एक्टर होने के बावजूद फिल्में फ्लॉप हुई हैं तो जितना बड़ा बेनिफिशियल दिखता है उतना इसमें रिस्क भी होता हैं।
क्या मल्टी स्टारर फिल्में हमेशा सफल होती हैं ?
देखिए इसका सीधा जवाब यह है कि मल्टी स्टार फिल्में हमेशा सफल हो ऐसा कोई जरूरी नहीं है क्योंकि ऑडियंस केवल स्टार्स को देखने नहीं आती है ऑडियंस देखने आती है अच्छी कहानी, अच्छा निर्देशन होना चाहिए फिल्म में मनोरंजन होना चाहिए, उनको जो चाहिए अगर वो मिलता है तो फिल्में हिट होने के बहुत ज्यादा चांस बढ़ जाते हैं वहीं अगर कंटेंट कमजोर होगा तो कितना भी स्टार पावर होगा तो फिल्म लंबे समय तक नहीं टिक पाती है बॉक्स ऑफिस पर नुक़सान के चांस भी बढ़ जाती हैं।

मल्टी स्टारर फिल्मों की चुनौतियां
बजट बहुत बड़ा होना
मल्टी स्टार फिल्म की कुछ चुनौतियां भी हैं जैसे अगर कई सारे एक्टर्स एक साथ काम करते हैं किसी फ़िल्म में तो उनको साइन करने से लेकर उनके सारे जो भी फैसिलिटी जो उनको देनी पड़ती है उस सब पर काफी बड़ा बजट खर्च होता है उनकी फीस इतनी है भारी भरकम होती है जिसके कारण फिल्म का बजट बहुत बड़ा हो जाता है और उसके बाद कलाकारों की फ़ीस शूटिंग शेड्यूल और प्रोडक्शन लागत इतना बढ़ जाता है कि इससे निर्माता पर हमेशा अतिरिक्त दबाब बना रहता हैं।
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स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट
मल्टी स्टार फिल्मों का एक सबसे बड़ा चुनौती यह होता है कि हर कलाकार को स्क्रीन पर संतुलित करना,उनको प्रॉपर स्क्रीन टाइम देना बहुत जरूरी होता है यदि किसी कलाकार के प्रशंसक को ये लगता है कि उनके जो पसंदीदा कलाकार है उनको पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया स्क्रीन पर तो एक नेगेटिव प्रतिक्रिया भी आती है जिसके कारण माउथ पब्लिसिटी के कारण भी कभी-कभी नुकसान होने के चांस बढ़ जाते हैं।
क्रिएटिव मैनेजमेंट
कई बड़े सितारों के साथ काम करना आसान भी नहीं होता है कि की जो फिल्म के निर्देशक होता है उनको सारे एक्टर्स के बीच संतुलन बनाना पड़ता है हर किरदार पर काफी काम करना पड़ता है ताकि कहीं किसी के साथ कोई अन्याय ना हो,
या फिर किसी स्टार को ये ना लगे कि मुझे स्क्रीन टाइम कम दिया गया है या इसे आसान भाषा में समझिए की किसी को कम वैल्यू तो नही दिया गया है जिसके कारण निर्देशक को काफी इस पर मेहनत करनी पड़ती है और इसमें बहुत सारा टाइम भी जाता हैं।
आधुनिक दौर में Multistar Film Business Model
आज के दौर में फिल्म इंडस्ट्री काफी तेजी से बदलती जा रही है ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और दर्शकों की बदलती पसंद के कारण निर्माता केवल मल्टी स्टार निर्माता केवल मल्टी स्टार पर निर्भर नहीं होना चाहते फिर भी आज भी मल्टी स्टार फिल्म का आकर्षण कम नहीं हुआ हैं।
आज भी निर्माता ऐसी फिल्मों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जिसमें मजबूत कहानी के साथ बड़े कलाकार हो तो सोने पर सुहागा इससे कंटेंट और स्टार पावर का संतुलन बना रहता है और फिल्मी हिट होने के चांसेस बहुत ज्यादा बढ़ जाता हैं।
निर्माता मल्टी स्टारर फिल्मों में निवेश क्यों करते हैं?
इसके पीछे कई व्यावसायिक कारण हैं:
- बड़ी ओपनिंग मिलने की संभावना
- व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंच
- बेहतर OTT और सैटेलाइट डील
- मजबूत ब्रांड वैल्यू
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर प्रदर्शन
- सोशल मीडिया पर ज्यादा चर्चा
यही वजह है कि Multistar Film Business Model आज भी फिल्म उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
क्या भविष्य में मल्टी स्टारर फिल्मों का महत्व बढ़ेगा?
फिल्म मेकिंग के बदलते परिवेश को देखते हुए ऐसा कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में भी मल्टी स्टार फिल्मों का चालन बना रह सकता है हालांकि किसी फिल्म की सफलता केवल स्टार कास्ट से नहीं, जबकि फिल्म की कंटेंट से तय होती हैं।
दर्शक आप पहले से अधिक एक्टिव है वह अच्छी कहानी को ही देखना ज्यादा पसंद करते हैं इसलिए भविष्य में भी मल्टी स्टार फिल्में बनेगी और बड़े स्टार्स के साथ मजबूत कंटेंट अगर हो तो और ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
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फाइनल निष्कर्ष
Multistar Film Business Model केवल कई सारे सितारों को एक साथ लाने की प्रक्रिया नहीं है यह एक रणनीति है और ये जोखिम को कम करने का, Marketing, Distribution, और राजस्व को बढ़ाने का एक बेहतरीन तरीका माना जाता हैं।
मल्टी स्टार फिल्में निर्माता को बड़े ऑडियंस तक पहुंचने में काफी मदद करती है बेहतर बिजनेस डील हासिल करने में मदद करती है वही फिल्म की मार्केटिंग वैल्यू बढ़ाने में भी काफी सहायक होती हैं।
हालांकि सफलता उन्ही फिल्मों को मिलती हैं जिनका कंटेंट अच्छा होता हैं दर्शकों का मनोरंजन कर पाती है वही फिल्में हिट होती है यही कारण है की फिल्म इंडस्ट्री में मल्टी स्टार फिल्म का मोडल आज भी बरकरार है और आने वाले समय में भी यह मॉडल बना रह सकता हैं।
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