दोस्तों आपने कई बार सुना होगा Satellite Rights वर्ड्स लेकिन क्या आप जानते हैं की ये फिल्म इंडस्ट्री में इतना पॉपुलर वर्ड क्यों हैं और क्या होता हैं इससे कैसे फिल्म निर्माता मोती रकम कमाते हैं तो आज का हमारा ये आर्टिकल ऐसी पर आधारित हैं जिसमे बात करेंगे इसके हर पहलु पर वही बात करेंगे Digital Right और Satellite Rights में क्या फर्क होता हैं ?
क्या होता हैं Satellite Rights ?
जा हम बात करते हैं Satellite Rights की तो इसका मतलब होता हैं की जब कोई भी निर्माता कोई फिल्म या कोई वि वीडियो कंटेंट जैसे वे फिल्म बनता हैं तो वो कई तरह के राइट्स बेचता हैं जिससे उसकी कमाई होती हैं उसी में एक होता हैं Satellite Rights इसका मतलब हैं की कोई भी निर्माता अपनी फिल्म,वेब सीरीज़ या कोई भी वीडियो कंटेंट का राइट्स टीवी चैनल को एक तय समय सिमा के लिए बेचता हैं जिसके लिए टीवी चैनल उसको एक अमाउंट पे करता हैं
उसके बाद वो चैनल अपने लिए हुए राइट के बाद उस फिल्म या बेब फिल्म को Broadcast करता हैं अपने चैनल पर जिससे उसको भी अच्छी कमाई होतीं हैं उस कंटेंट के बिच में Ad लगाकर | यानि की दोनों को इससे अच्छा मुनाफा होता हैं ऐसी प्रकिया को कहा जाता हैं Satellite Rights
फिल्म निर्माता Satellite Rights क्यों बेचते हैं?
अब इसको डिटेल्स में समझते हैं की कोई भी निर्माता आखिर क्यों बेचता हैं ये राइट जैसा मैंने ऊपर बताया हैं की इससे उसकी अतिरिक्त कमाई होती हैं आजकल बहुत साडी अच्छी फिल्मे भी कभी कभी बॉक्सऑफिस पर मुनाफा नहीं कर पाती हैं जिसके कारण निर्माता को नुकसान भी उठाना पड़ता हैं उसी नुकसान की भरपाई Satellite Rights को बेचकर किया जाता हैं |
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वैसे भी फिल्मे एक बार थियेटर में रिलीज़ हो जाने के बाद प्रोडूसर दूसरी फिल्मो की तरफ अपना पूरा ध्यान लगता हैं तो वो चाहता हैं की जो भी सारे राइट हैं उसको बेचकर दूसरी फिल्म के लिए तैयारी करता हैं और कभी कभी जो फिल्मे बॉक्सऑफिस पर सुपर हिट होती हैं तो ऐसे में उसको दोहरी कमाई होती हैं राइट बेचकर | यही मुख्य कारन हैं की कोई भी निर्माता अपनी फिल्म का Satellite Rights और जितने राइट्स होते हैं उसको बेच देता हैं |

Satellite Rights कैसे काम करते हैं?
अब बात करते हैं की Satellite Rights कैसे काम करता हैं क्या होता हैं उसके टर्म और कंडीशंस – जब एक निर्माता अपना राइट बेचता हैं तो वो एक डील करता हैं चैनल के साथ जिसमे ये तय किया जाता हैं की कितने बजट में हो उसे बेच रहा हैं कितने सालो के लिए और किस किस लैंग्वेज के लिए सेल क्र रहा हैं, टीवी चैनल और निर्माता अगर दोनों एग्री हो जाते हैं तो एक एग्रीमेंट तैयार किया जाता हैं जिसपर सारे टर्म और कंडीशंस लिखे जाते हैं और उसके बाद टीवी चैनल पेमेंट करता हैं और फिर उसको वो राइस मिल जाता हैं और वो अपने चैनल पर ब्रॉडकास्ट करता हैं |
Satellite Rights और Digital Rights में क्या अंतर है?
इन दोनों राइट्स में काफी फर्क होता हैं आइये ऐसे आसान भाषा में समझते हैं –
Satellite Rights = TV पर दिखाने का अधिकार
Digital Rights = OTT/Internet पर दिखाने का अधिकार
मतलब की अगर कोई Satellite Rights खरीदता हैं इसका मतलब ये होता हैं की उसके पास केवल टीवी पर प्रसारण का अधिकार हैं वही अगर कोई Digital Rights खरीदता हैं तो उसके पास OTT और इंटरनेट दोनों राइट्स होते हैं जैसे Netflix, अमेज़न प्राइम जैसी ओटीटी कंपनियां डिजिटल राइट्स खरीदती हैं और वो इंटरनेट के ज़रिये उस कंटेंट को लोगों तक पहुँचता हैं |
पब्लिक दोनों जगह से कंटेंट का आनंद उठा सकती हैं लेकिन OTT के लिए उसे सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता हैं वही टीवी के लिए केवल मंथली पैक, वही दोनों अधिकार अलग-अलग कंपनियों को बेचे जा सकते हैं, आजकल कई फिल्मो के OTT डील और सॅटॅलाइट अलग अलग बेचे जाते हैं | Digital Rights के कारण दर्शक फिल्म को कभी भी देख सकते हैं, जबकि Satellite Rights में चैनल के तय समय पर देखना पड़ता है|
किसी फिल्म की Satellite Rights की कीमत कैसे तय की जाती है ?
किसी भी फिल्म की Satellite Rights की कीमत कई बातों पर निर्भर करती है, सबसे पहले फिल्म की स्टारकास्ट देखी जाती है, क्योंकि बड़े स्टार्स की फिल्मो को ज़्यादा दर्शक मिलने की सम्भावना रहती हैं, इसके अलावा फिल्म का बजट, निर्देशक, प्रोडक्शन हाउस और फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच कितना उत्साह है, यह भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं | यदि किसी फिल्म से अच्छी बॉक्स ऑफिस कमाई की उम्मीद हो या वह किसी लोकप्रिय फ्रेंचाइज़ का हिस्सा हो, तो उसके Satellite Rights की कीमत भी बढ़ सकती है। यही कारण है कि हर फिल्म के Satellite Rights की कीमत अलग-अलग होती है |
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क्या Satellite Rights से फिल्म रिलीज से पहले कमाई कर सकती है?
हाँ, कई फिल्मों के मामले में Satellite Rights से फिल्म रिलीज़ से पहले ही कमाई हो जाती है। जब कोई फिल्म बड़े स्टार्स या मजबूत कंटेंट के साथ बनती है, तो टीवी चैनल उसे रिलीज़ से पहले ही खरीद लेते हैं। इससे फिल्म निर्माता को बॉक्स ऑफिस पर आने से पहले ही एक बड़ी रकम मिल जाती है, जिससे उनकी प्रोडक्शन कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा कवर हो जाता है। इसी वजह से कई बार फिल्म थिएटर में कैसी भी परफॉर्म करे, निर्माता पहले से ही कुछ हद तक सुरक्षित हो जाते हैं क्योंकि Satellite Rights की डील पहले ही हो चुकी होती है।
बॉलीवुड की कुछ बड़ी फिल्मों के Satellite Rights क्यों चर्चा में रहते हैं?
बॉलीवुड की बड़ी फिल्मों के Satellite Rights अक्सर चर्चा में इसलिए रहते हैं क्योंकि इन फिल्मों से टीवी पर बहुत ज्यादा दर्शक जुड़ते हैं। जब किसी फिल्म में बड़े सितारे होते हैं या वह पहले से ही बहुत ज्यादा पॉपुलर होती है, तो टीवी चैनल उसे अपने चैनल पर सबसे पहले दिखाने के लिए बड़ी रकम देने को तैयार रहते हैं | कई बार फिल्म के थिएटर रिलीज़ से पहले ही Satellite Rights की डील इतनी बड़ी होती है कि वह मीडिया में खबर बन जाती है। इसके अलावा, अगर कोई फिल्म सुपरहिट साबित होती है तो उसके टीवी प्रीमियर का इंतज़ार भी दर्शक बेसब्री से करते हैं, जिससे उसका Satellite Value और भी बढ़ जाता है।
निष्कर्ष –
मुझे उम्मीद हैं की आपको समझ आ गया होगा की Satellite Rights क्या होता हैं और किस तरह ये काम करता हैं ये फिल्म इंडस्ट्री का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं जिसमे निर्माता को फिल्म के रिलीज़ से पहले या बाद में बॉक्सऑफिस के अलावा कमाई करने का मौक़ा मिलता हैं वही डिजिटल राइट भी कुछ हद तक ऐसा ही हैं लेकिन दोनों का स्थ अलग अलग हैं इसलिए दोनों राइट्स अलग अलग बेचे जाते हैं |
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